हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,इस्लामी शिक्षाओं के शोधकर्ता ने "निंदा करने वालों की फटकार से न डरने को आज की ईरानी उम्मत की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बताया जो वैश्विक दबावों के सामने खड़ी है। उन्होंने कहा, प्रतिबंधों और हर तरह के हमलों के खिलाफ ईरानी उम्मत की 47 सालों की स्थिरता और दृढ़ता, इसी कुरानी विशेषता का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद मुहम्मद सादिक़ अबतही ने पवित्र आयत की व्याख्या करते हुए कहा:«فَإِذا جاءَ وَعْدُ أُولاهُما بَعَثْنا عَلَیْکُمْ عِباداً لَنا أُولی بَأْسٍ شَدیدٍ»
यह आयत ऐसे कठोर और शक्तिशाली लोगों के उठाए जाने की शुभ सूचना देती है जो विद्रोहियों के खिलाफ लड़ेंगे। उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की प्रामाणिक रिवायत का हवाला देते हुए कहा कि जब एक रावी ने उन मुजाहिदों की पहचान पूछी, तो इमाम ने तीन बार कहा,उन क़ौम के लोग, ख़ुदा की क़सम, वो क़ुम के निवासी हैं। यह रिवायत इस क्षेत्र की पवित्रता और ज़ुहूर इमाम मेहदी के प्रकट होने से पहले सत्य के लिए उठने वाले आंदोलनों में इसकी मुख्य भूमिका को इंगित करती है।
उन्होंने कहा, क़ुम के पवित्र शहर का इस्लामी क्रांति में अग्रदूत और प्रेरक इंजन के रूप में भूमिका, इस रिवायत से आश्चर्यजनक रूप से मेल खाती है, जो यह दिखाती है कि ईरानियों और विशेष रूप से ज्ञान और न्यायशास्त्र के केंद्रों को अत्याचार के खिलाफ लड़ाई का ध्वजवाहक बनने के लिए ईश्वरीय इरादे से नियुक्त किया गया है।
इस धार्मिक विशेषज्ञ ने सूरए माइदा की आयत 54 का हवाला देते हुए उस क़ौम की प्रमुख विशेषताएँ गिनाईं जो इस्लाम लाएगी, और कहा, पैगंबर-ए-अकरम (स.अ.व.) के स्पष्ट कथन के अनुसार, ईरानी वही क़ौम है जो मोमिनीन के सामने नम्र है, काफ़िरों के सामने कठोर है, और जेहाद के रास्ते में किसी निंदा से नहीं डरती।
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